Wednesday, 15 June 2016
Ravi Chaudhary
Sunday, 5 June 2016
ठंडी औरत
आप सोच रहे होंगे की मै रवि किसकी बात कर रहा हूँ कौन है ये सोनिया और आखिर इसका मेरे संग क्या रिश्ता है ।
बात उन दिनों की है जब मै जवानी की दहलीज पर था। नया खून और तन में आग इस उम्र की निशानिया होती है और यही आग अंदर ही अंदर हर किसी को जलाती है जब तक इसे बुझा न लो , पर ये आग न पानी से बुझती है न ही मंजिल को पाने से ,ये तो वो कुँआ है जो कभी भर ही नही सकता । जिसे हवस कहते है ।
और मै भी बाकी जवानों की तरह तन की आग को बुझाने उन गलियो में जा पहुचा जहाँ दिन कुछ और रात कुछ और । ये मेरी पहली भूल थी जिसे मै अपने दोस्तों के साथ करने जा रहा था । हर तरफ रंगीनिया नजर आ रही थी ,लोगो का ताता सा लगा था जैसे कोई मन्दिर आया हो , पर देवी को पूजने नही बल्कि दुसरो की बेटियो के कपड़े उतारने । इस बदनाम गली मे लोग इशारो से काम ले रहे थे , ऊपर से लडकिया आवाजे लगा रही थी और निचे उनके दलाल दाम बता रहे थे जैसे फल या सब्जी बेच रहे हो ।
तभी एक लँगड़ा दलाल हमारे पास आकर गाना गाने लगा ... चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है ,,, पहली मुलाक़ात है ये पहली मुलाक़ात है ।
पहले तो हम डर गए फिर उस लगड़े ने गाना बदल दिया और बोला ,,,,, टिप टिप बरशा पानी पानी में आग लगी ,,, क्या साहब क्या सेवा करुँ , हम डरे हुए थे इसलिए हमने कहा हमे कुछ नही चाहिए । तभी सलमान मेरा दोस्त बोला कुछ अच्छा है । लंगड़ा दलाल हँसा और फिर बोला तबियत खुश न हुई तो नाम बदल देना । उसने आँखो से इशारा किया और हम उसके पीछे हो लिए , हम एक मकान के सामने आ गए
,वो हमे ऊपर ले आया और तस्वीरें दिखाने लगा , सकल से तो लँगड़ा किसी movie का comedian लगता था , पर इस बदनाम गली में हर चेहरा नकली था । जिसका पता मुझे तब लगा जब अचानक वहा कुछ लोग आ गए जो उनके ही लोग थे उन लोगो ने बिना हमारी मर्जी के हमारे जेब से सारे पैसे निकाल लिए और सिर्फ घर जाने का भाड़ा छोड़ दिया , हम कुछ नही कर सकते थे क्योंकि हम ये बात जानते थे की इस बदनाम गली में ये सब होता ही रहता है इसलिए हम सिर्फ 200 रूपये ही ले कर चले थे ।
जल्द ही हमे हमारे कमरे तक छोड़ दिया गया मेरे सारे दोस्त अपने कमरो में चले गए और अब मेरी बारी थी ,जैसे ही मै अंदर गया अंदर का माहौल काफी चमकदार था कुछ अजीब सी सजावटे और किताबे जो की चारो ओर बिखरी हुई थी । एक लड़की जो कोने मे बैठी पढ़ रही थी । उसने मुझसे कहा बैठ जाओ साहब अभी आती हू । मै इधर उधर देखने लगा और पास की चारपाई पर बैठ गया । मै कुछ सोच ही रहा था की वो मेरे सामने आ गई और बोली साहब पानी ,,,, ,, । मैने कहा नही thanq ..
मै काफी घबराया हुआ था और शायद वो भी ।
मैने कहा मुझे कुछ नही करना बस तुम यहाँ बैठ जाओ और बताओ की तुम क्या करती हो ।
क्या तुम पढ़ती भी हो ?
कुछ देर रुक कर वो बोली हा थोडा बहुत शौक है कभी स्कूल नही जा सकी पर पढ़ने का शौक हमेशा रहा , ☺☺☺☺☺
तो तुम्हारा नाम क्या है ,,, पता नही माँ ने क्या नाम रखा था पर सब लोग मुझे सोनिया बुलाते है । काफी देर के लिए कमरे मे ख़ामोशी छा गई
सोनिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया और उसे कस के पकड़ कर मेरी तरफ देखने लगी जैसे डूबते को तिनका मिल गया हो । मै भी सोनिया को देखने लगा ।
मै मन ही मन सोचने लगा की इतनी कम उम्र में सोनिया जैसी लड़की आखिर किन कारणों से इन गन्दे हालातो मे फस गई । सोनिया जैसी खूबसूरत और हिरणी आँखो वाली लड़की के साथ ये जो कुछ भी हो रहा था ये सब ठीक नही था पर मै चाह कर भी उसे इस दलदल से नही निकाल सकता था ।
और तभी सोनिया एक गीत गुनगुनाने लगी, ऐसा लगा जैसे संगीत की देवी कोई दर्द भरा गीत गुनगुना रही हो । मेरा हाथ उसके हाथ में था और वो गीत गा रही थी । उसकी सुंदर आँखे ,वो बाल , वो चेहरा ..... किसी का भी दिल पिघला दे । जल्द ही हम काफी करीब आ गए उस दिन पहली बार मैने किसी से दिल खोल कर बाते की जैसे जन्मों के दोस्त हो । ये पल मै कभी नही भूल पाया और कुछ देर बाद मैने उसके माथे को चूम लिया और कमरे मे एक सन्नाटा सा छा गया ।
कुछ देर तक हम एक दूसरे को देखते रहे तभी दरवाजे पर किसी की आहट हुई , वो मेरा दोस्त सलमान था , उसने कहा ..चल अब यहाँ से अब बहुत देर हो गई । सोनिया ने मेरे हाथो को कस कर पकड़ लिया जैसे वो नही चाहती थी की मै जाऊ और कहि न कहि मै भी यही चाहता था पर मै मजबूर था जाने के लिए ।
सोनिया ने कहा की अब कब आओगे ... मै जानता था की अब मै इस बदनाम गली मे कभी नही आउगा पर मैने उससे कह दिया जल्द ही , और ये कह कर तेजी से मै वहा से निकल गया , मेरी आखो में आंसू थे और दिल में टिस ,की आखिर मैने उससे झूठ क्यों बोला । वो वही छत पर खड़ी मुझे जाते देख रही थी और न जाने क्यों मुझे उसकी भी आँखे नम लगी और मै उस जगह से निकल गया ।
वो धीरे से पीछे मुड़ी और बोली कौन , मैने कहा मै हूँ रवि कुछ याद आया ,
उसने मुझे देखा और तभी वो तेजी से खाँसने लगी ,मैने जैसे ही उसे सहारा देने के लिए हाथ लगाया मुझे आभास हुआ की उसे बहुत तेज बुखार है और वो खाँसते -2 बेहोश हो गई ।
मैने फौरन auto बुलाया और वही के एक आदमी जो की फल बेचता था की मदद से उसे auto में डाला और हम अस्पताल की ओर चल दिए । मैने कहा भाई जल्दी ले चलो ,,
कुछ देर रुक कर auto वाला बोला साहब जी आप काफी नेक बन्दे लगते है इस वेश्या का कोई नही है न जाने कब से गली में ही रह रही थी । मैने ऑटो वाले से पूछा की क्या तुम इसे जानते हो तो ऑटो वाला बोला हा साहब मै पछले 30 सालो से यहा रिक्शा चला रहा हूँ और हर किसी को जानता हूँ । बडा अधर्म हुआ इसके साथ ,, मैने पूछा क्या हुआ था ।
Auto वाला बोला साहब जब तक रस है तब तक भवरे मंडराते रहते है और जिस दिन रस खत्म हो जाता है कोई कुत्ता भी पूछने नही आता । आज कल हर धंधा करने वाली औरतो का यही हाल है । जब तक जवानी रहती है तब तक ग्राहक आते रहते है और जब जवानी ठण्डी हो जाती है तो इन्ही औरतो को भीख माग कर गुजारा करना पड़ता है । साहब बहुत बुरा हाल होता है इनका , न कोई काम देता है न कहि इज्जत मिलती है । लेकिन पेट तो पालना ही है न साहब तो अब भीख मांगनी ही पड़ेगी । न रहने के लिए को घर न ही कोई रिश्तेदार । साहब आजकल तो हर बूढी वेश्याओ का यही हाल है , कुछ आत्महत्या कर लेती है। तो कुछ लड़ती रहती है कभी खुद से तो कभी समाज से। ये सब सुन कर मेरी आँखे नम हो गई ।
( लो साहब अस्पताल आ गया ।...... )
मैने अपनी आँखे साफ़ की और सोनिया को अंदर ले गया । डॉक्टरों ने मुझे बताया की उसे केंसर है और अब उसके बचने की कोई उमीद नही है । अब वो जादा से जादा 3 से 4 महीने ही जी पाएगी । ये अब सुन कर मेरे पैरो तले जमीन खिसक गई । पर मैने फैसला कर लिया की ये आखरी पल उसके अपने पल है और उसे भी जीने का हक है । वो खुशिया जो उसे नही मिल पाई मै उसे दूँगा । अब उसका हर पल हजार जिंदगियां जिएगा ।
डॉक्टरों ने कहा की अब मै उनसे मिल सकता हूँ । मै काफी डरा हुआ था की क्या मै उसे याद होगा । आखिर कार मै उसके सामने आ ही गया । सोनिया मुस्कुरा रही थी । उसने मुझसे कहा आखिर तुम आ ही गए ।
मैने कहा हां आ गया पर थोडी देर हो गई ।
सोनिया बोली कोई नही ,,,,, आ तो गए ।
हमारी आँखे एक दूसरे को देख रही थी ।
ऐसा लग रहा था जैसे मै फिर उसी वक्त में आ गया हूँ जब मै सोनिया से पहली बार मिला था ।
और शायद वो भी यही महशुस कर रही थी ।
लेखक
रवि चौधरी
Thursday, 2 June 2016
Why Indian Boys and Girls losing Virginity Fast
ये लेख एक सुरुआत है तथा इसका सम्बन्ध किसी भी जाती से नही है ,अगर इस लेख को पढ़ कर किसी को कोई दुःख या खेद होता है तो लेखक इसके लिए क्षमा चाहता है ..
भारतीय समाज हमेंशा एक जाती प्रधान एवं सामजिक मान्यताओं के अधीन रहा है।. जहा सेक्स तथा इसकी जागरूकता के प्रति हमेशा एक, लडाई रही हैं। इएक आकलन के अनुसार 2020 तक भारत पुण रूप से sex को स्वीकार कर लेगा और कोमार्य इतिहास की बाते रह जाएगी । क्या हम अपनी भारतीय लज्जा को खो चुके है ।. आज का समाज इन सब मान्त्याओ को तोड़ कर आगे बढ़ गया है .. ख़ास कर हमारे युवा वर्ग, जो की सेक्स के प्रति कुछ जादा ही आतुर नजर आते है। वो अब शिक्षा से जादा सेक्स के प्रति पागल रहते है। आज कल लड़का हो या लडकी सेक्स करने के लिए ये आतुर रहने लगे है. जो कई हद तक भारतीय समाज के लिए घातक है .।.
आज कल tuition and study center का काफी बोल बाला रहता है । एक बड़ा युवा वर्ग इन centers में दाखीला लेता है ,, पर इन दाख्लो के पीछे एक कडवा सच भी है ,, अधिकतर युवा वर्ग ऐसे study points पर दाखिला केवल फन एंड न्यू friendships के लिए लेते है। जिनमे अमीर वर्ग के वो युवा होते है जो time पास करना चाहते है ।.माता पिता को झूट बोल कर ये युवा latenight partys करते है तथा कम ऊम्र में ही गलती कर बैठते है . और फिर पछताते है। धीरे धीरे ये trand मध्यम वर्ग में भी केंसर की तरह फैल रहा है और हम ये सब होते हुए भी देख रहे है । centers में एक दुसरे का number पास करना तथा एक दुसरे से friendsship करवाना आज कल युवा trand का एक part सा बन गया है। . और ये सिर्फ लडको की ओर से नही.. लडकिया भी इसमें बढ चढ़ कर साथ डे रही है। . study के बाद बाहर मिलना घूमना एक आम बात सी हो चली है ..।
समाज हमेशा से कामुक और fashionable रहा है और इस कामुकता को आज के संसाधान और लालच ने बढ़ावा दिया। जिसमे कार बाइक और फ़ोन एक खाश जरिया रहा है । आज के युवा वर्ग को बिगाड़ने के लिए .. छोटी ऊम्र में ही अभिवाहक अपने बच्चो को कार या बाइक चलाने के लिए दे दे ते है वो भी बिना सोचे समझे,, वो तो ये भी नही जानते की वो इन का क्या गलत इस्तेमाल कर रहे है । रात भर इधर उधर घूमना और लडकियों को घुमाना आज के युवाओं का time पास है । लडकिया भी इस में पीछे नही है । देखा जाए तो लडकिया उन्ही लडको को पसंद करती है जिनके पास कार या बाइक हो ,, ताकि हो बिना किसी परेशानी की कही भी आ जा सके । भले वो लड़का गुंडा ही क्यों न हो ,, या उन्हें अपनी इज्जत खो नी पड़े । .. fashion के लिए सब कुछ ... ।
वही दूसरी ओर लडके भी अपनी हवश या प्यार मिटाने के लिए लडकियों को खुश करने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है ,, भले बाप से झूट ही बोलना पड़े.. पर बाद मे वो भि इसके बदले लडकियो से मजे लेते है.. और लडकिया भी इसमें उनका साथ देती है
लडकियों का रातो में लेट night partys में जाना और वहा किसी भी लडके से दोस्ती कर लेना और फिर coffe के नाम पर उनके घर जाना. समाज का एक नया आइना पेश करता है। ..और साथ ही एक प्रशन भी उठाता है की क्या ये सब टिक है.।.
आखिर क्या हो गया है ।हमारे समाज को और हमारे युवा वर्ग को आखीर वो इतने थिथिल क्यों हो रहे है। क्या काम पर काबू करना इतना मुस्किल हो रहा है की भारतीय समाज को अब ये छुपाने इतना मुस्किल हो रही है की वो अब सदियों से चली आ रही सच्ची भारतीय परम्परा का अंत चाहते है.. और पुन रूप से अमेरिकी हो चले है ।,,
Mobile... Andriod is coming …
आज लडकियों और लडको का सबसे बड़ा दुश्मन मोबाइल ही है क्युकी एक बड़ा युवा वर्ग इस बीमारी की चपेट में है । ये जीवन को सरल तो बनाता है पर इसकी एक बड़ी कीमत चुकानी पडती है हमारे युवा वर्ग को खाश कर लडकियों को .।. सोशल sites पर अपनी कामुक तस्वीरे डालना और गंदे comment पास करना एक हॉबी बन गई है जो सभी मजे लेकर करते है .।.
watsup , fb ,पर तो आज की नारियो ने तो कोहराम ही मचा रखा है। एक से एक hot तस्वीरे डाल कर वो आज के युवा वर्ग को sexualiy अपनी ओर खीचने की कोशिस करती है जिससे boys का दिमाग हमेशा इन्ही ओर रहता है .. और कई अनेतिक हादशे हो जाते है.।.
फ़ोन पर porn या गंदे massages forward करना एक trand बन गया है ,, जिससे आज का हर वर्ग बिगड़ रहा है और लडकिया भी इनमे पीछे नही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ जादातर mms बनाने में लडकिया help करती पाई गई है ,,।
fun के नाम पर या as a friend boys girls को touch करने से बाज नही आते . वही 95% girls को इसमें कोई एतराज़ नही होता ,, बल्कि कभी कभी girls भी have fun के नाम पर आग में घी डालने का काम करती है ,,
अपनी nude pic send करना भी आज के trand का एक part बन गया है जिसका हर्जाना सिर्फ लडकिया ही भुगतती है और लडके उस pic को स्प्रेड कर मजे लेते है ।,, पर वो pic लडकी ने send ही क्यों की ...इसमें जितना दोस लडकी का था उतना ही लडके का भी ,,,आप क्या सोचते है ?
Family out Boyfriend In
ये सम्माज का नया trand है। युवा माँ पाप के बाहर जाते ही अपनी gf या bf को अपने घर ले आता है और फिर समाज के सारी हदो को एक ही बार तोड़ देता है,, बिना किसी लोक लाज के एसा करना आज के fashionable youth का part time जॉब है .. जो वो कभी भी कर लेते है ,, बस सही time मिल जाए ,,,,, Family out Boyfriend In
आज कल कोई भी प्लेस नही देखता वो car हो या होटल ,,,, भारतीय समाज आज एक दोहराहे पर आ चुकी है जहा से अब वो वापस नही जा सकती ,, western cuclture ने आज के युवाओ को पूरी तरह काबू में कर लिया है जिससे बचना अब मुस्किल है पर अभी भी आश है की कुछ हो सकता है ।
| आखरी ख़ुशी (एक साया) | |||
Wednesday, 1 June 2016
एक रात की दुल्हन
बस इसी तरह देविका और उसकी दादी का जीवन चल रहा था ।
दादी अपनी झोपडी में बैठी हमेशा की तरह देविका की राह बाट रही थी । तभी देविका आ गई । का री इतना देर कहा लगा दिया । उ दादी आ कुछ जादा ही काम था और हमरी फिकर न किया कर । काहे न करू , दिन रात सोचत रहती हूँ की तेरी शादी कब करुँगी । ये सारे गांव वाले राह देख रहे है की मै कब मरु और वो कब तुझे नोच खाए ।
ओ दादी इतना मत सोच अभी तू और 100 साल जिएगी । चल अब ई बता की कमली अपने सशुराल से आई या नही ।
हां हा आ गई जा मिल ले पर घर जल्दी आ जइयो , ठीक है दादी हम आ जई ।
कमली के घर
और कमली कईसी है , अरे देविका तू आ जा हम तोहरे याद कर रही थी ।। हा हा मै आती हूँ पर ई तो बता की जीजा जी ने इतने दिन तक आने क्यों नही दिया , जा धत देविका हम नही बताएगी । बोलो न क्या किया जीजा जी ने ।
( दोनों मुस्कुराने लगी और कुछ देर बाद.....)
तेरे जीजा बड़े जानवर है ,पहले तो दो मटके तारी पि गए और फिर नशे में पूरी तरह पागल होकर मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए फिर अपने होटो की शराब मेरे होटो पर उतार दी और मै कुछ नही कर पाई , रात भर वो मुआ कुश्ती करता रहा और मेरा बदन टूटता रहा । जब सुबह हुई तो न मै होश मे थी न वो । कई दिनों तक तो मै सास भी नही ले पाई । पर जैसे ही पिताजी मुझे लेने आए मै फौरन वहा से भाग आई । वो मुआ तो मुझे आने ही नही दे रहा था । मै ही जानती हूँ की मै कैसे उस मुए के हाथो से बची ।
( ये सब सुन कर देविका हँसने लगी ....)
उस रात देविका ने खाना बनाया और जो भी रुखा सुखा था खा कर दोनों सो गए । अभी रात के आधी भी नही हुई थी की अचानक कुछ आवाज आई , जिससे दादी की आँख खुल गई पर देविका अभी भी सो रही थी ,दिन भर कड़ी मेहनत करने के कारण वो काफी गहरे नींद में थी। दादी उठी और दिया उठा कर इधर उधर देखने लगी ,तभी उसे अँधेरे में कुछ नजर आया , वो कोई आदमी की आकृति थी जिसे देख बुढ़िया डर गई तभी उस आदमी ने तेजी से बुढ़िया का मुँह दबा कर बोला ।
सुन मै एक डाकू हूँ और अगर तूने सोर मचाया तो तुझे मार डालूँगा , राजा के सिपाही मुझे ढूढ़ रहे है और अगर उन्होंने मुझे पकड़ लिया तो फाँसी पर चढा देगे । ये सब सुन कर बुढ़िया शांत हो गई ये देख डाकू ने भी अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया और कोने में जा कर बैठ गया । बुढ़िया बोली बेटा मेरे जैसी बूढी के पास क्या है जो तू मुझे लूटने आया है , ये सुन डाकू बोला की राजा के हाथ लगा तो वो मुझे मार देगा इसलिए मै भागा भागा फिर रहा हूँ पर अब मै थक चुका हूँ भागते- 2 । न जाने कब मारा जाऊ । तभी डाकू की नजर दूसरी तरफ गई जहां देविका सो रही थी । उसका रूप देख कर डाकू का मन और दिल दोनों मचल उठा ,उसे सुनहरे सपने नजर आने लगे । उसके मन से मौत का डर निकल गया , उसने देविका की ओर इशारा कर के बुढ़िया से पूछा वो कौन है । बुढ़िया कुछ सोच कर बोली वो मेरी पोती देविका है ।
डाकू कुछ देर सोच कर बोला मुझे तुम्हारी पोती से शादी करनी है । ये सुन कर बुढ़िया के होश उड़ गए और वो रोने लगी की हमे छोड़ दो हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है मेरी पोती को छोड़ दो । तुम कब मर जाओ कौन जाने , क्यों मेरी पोती की जिंदगी खराब करना चाहते हो ।
( कुछ देर तक एक शान्ति सी छा गई ....)
डाकू बोला मै जानता हूँ की मै मरने वाला हूँ पर मरने से पहले मै अपनी दिल की सभी इच्छाए पूरी करना चाहता हूँ । यही कारण है की मै तेरी पोती से शादी करना चाहता हूँ ।
तभी बुढ़िया रोते रोते बोली की अगर मैने अपनी पोती की शादी तुझसे कर दी तो लोग तेरे मरने के बाद मेरी पोती की जिंदगी नर्क बना देगे तो फिर उसका क्या होगा । और ये बोलते बोलते वो रोने लगी ।
डाकू कुछ देर सोच कर बोला अगर किसी को मालूम होगा तब न । हम आज ही रात को शादी कर लेगे और मैने आज तक जितनी भी दौलत लूटी है वो सब तुम दोनों को दे दूँगा । न किसी को पता चलेगा और तुम उस दौलत से अपनी सारी जिंदगी मजे में गुजार सकती हो । सोच लो एक रात में इतनी दौलत तुम्हे कभी भी नही मिलेगी और कल होते ही मै मारा जाउगा । किसी को भी पता नही चलेगा की हमारे बीच क्या हुआ ।
बुढ़िया सोच में पड़ गई की एक ही रात मे पोती दुल्हन भी बनेगी और विधवा भी और ऊपर से इतनी सारी दौलत और किसी को कानो कान खबर भी नही होगी । फिर किसी दूसरे गांव में जा कर फिर से अपनी पोती की शादी कर दूँगी
एक लम्बी सास के बाद बुढ़िया बोली मुझे मंजूर है पर मुझे पहले दौलत चाहिए फिर होगी शादी । डाकू मान गया और 2 घण्टे बाद काली मन्दिर में आने को बोल वहा से भाग गया ।
देविका मान गई
देविका अभी भी नींद में थी । दादी उसके पास गई और उसे जगाने लगी । जब देविका जाग गई तो दादी ने सारी आप बीती उसे सूना दी जिसे सुन कर देविका रोने लगी पर दादी ने उसे अपनी कसम दे कर कहा की अगर वो ये शादी नही करेगी तो वो अपनी जान ले लेगी । ये सुन कर देविका डर गई और शादी के लिए मान गई ।
उसी वक्त दादी और देविका अँधेरी रात में काली मन्दिर की ओर चल दिए । डाकू पहले से ही सारा इंतजाम कर के बैठा था , जल्द ही शादी शुरू हो गई डाकू ने सोने से भरी गठरी बुढ़िया को दे दी और बुढ़िया ने देविका का हाथ डाकू को सौप दिया । जब शादी की सभी रस्मे ख़त्म हो गई तो डाकू देविका को अपने साथ ले जाने लगा और कहा की सुबह होने से पहले इसे काली मन्दिर ले आउगा । बुढ़िया ने दोनों को जाने दिया और सोने से भरी गठरी लेकर मन्दिर में बैठ गई ।
आखरी सोहाग रात
देविका काफी डरी हुई थी की न जाने अब क्या होगा ये डाकू न जाने उसके साथ क्या क्या करेगा । देविका सोच ही रही थी की दोनों एक खण्डर के सामने आ गए ,डाकू न घास का बिस्तर बना दिया और लकडिया इक्कठी कर के आग जला दी और देविका को घोड़े पर से उठा कर घास पर फेक दिया और उसकी और ललचाई नजरो से देखने लगा । उसने पहले देविका के पैर पकड़ लिए और उन्हें चूमने लगा तभी देविका बोली की आज हमारी सोहाग रात है और मैने आपको दूध भी नही पिलाया । ये सुन कर डाकू हँसने लगा और बोला बस इतनी सी बात , मेरे पास दूध तो नही पर शराब बहुत है अभी लाता हूँ और डाकू अपने घोड़े से बन्धी एक सुराही ले आया जिसमे शराब थी और उसने उसे देविका के पास रख दी और बोला निकालो और पिला दो मुझे ,पर जल्दी करो आज मै तुम्हारी जवानी की किताब थोडा करीब से पढ़ना चाहता हूँ । देविका बोली अभी तो रात लम्बी और जवान है तो इतनी जल्दी क्यों । लो ये पि लो ।
देविका डाकू को शराब पिलाती रही और डाकू पिता रहा । जब शराब खत्म हो गई तो डाकू पूरी तरह पागल सा हो गया और देविका पर किसी भूखे शेर की तरह झपटा पर देविका वहाँ से हट गई । जिससे डाकू को गुस्सा आ गया और वो देविका से जबरदस्ती करने लगा ।
तभी अचानक डाकू के आँखो के आगे अँधेरा छाने लगा और वो जमीन पर गिर गया और उसके मुँह से झाग आने लगी और वो मर गया । देविका ने उसकी लाश को उठा कर घोड़े पर डाला और काली मन्दिर की ओर चल दी ।
खुनी कौन
जल्द ही देविका मन्दिर पहुच गई जहा दादी उसका इंतजार कर रही थी । दादी समझ गई थी की उसकी चाल कामयाब हो गई थी और जो जहर उसने देविका को दिया था वो उसने उस डाकू को पिला दिया ।
जल्द ही सुबह हो गई और मन्दिर में लोग आने लगे पर जब सब की नजर डाकू की लाश पर गई तो पुरे गांव में खबर फैल गई की डाकू की लाश मन्दिर मे पाई गई है । उस लाश को देखने के लिए राजा स्वयं आते है और पूछते है की इसे किसने मारा है तो कोई जवाब नही मिलता है । तभी भीड़ में से एक आवाज आती है महराज मेरी पोती ने । ये सुन कर सभी गांव वाले हैरान हो जाते है ।
राजा उन दोनों को आगे बुलाते है और सारा हाल बयान करने को कहते है । तो बुढ़िया बोलती है की महराज मै और मेरी पोती सुबह मन्दिर में आए तो इस डाकू ने हमपे हमला कर दिया पर मेरी पोती डरी नही और माँ काली का त्रिशूल लेकर इसके सीने में उतार दिया ।
ये सुन कर राजा बहुत खुश हुए और देविका को बधाई दी साथ ही साथ उससे विवाह का पसताव भी रखा जिसे देविका ने स्वीकार कर लिया । जल्द ही देविका की शादी राजा से हो गई और वो ख़ुशी ख़ुशी अपनी दादी के साथ रहने लगी ।
किसी को कभी पता नही चला की उस रात क्या हुआ । ये राज तो सिर्फ वो एक रात की दुल्हन ही जानती थी ।
| आखरी ख़ुशी (एक साया) | |||
Tuesday, 31 May 2016
एक रात का साथ ।
सुनो रुको ..... मै बुरी तरह डर गया और मेरे पाव वही जम से गए । न जाने कौन थी और मुझे क्यों आवाज लगा रही थी । जी हाँ वो एक लड़की की आवाज थी ।
सब कहते है की रात के वक्त कोई पीछे से आवाज दे तो कभी मुड़ के नही देखना चाहिए ।
पर मैने जल्दबाजी में पीछे मुड कर देख लिया । अब बहुत देर हो चुकी थी मैने गलती कर दी थी और अगर वो भूत था तो मेरी खेर नही थी ।
पीछे मुड़ते ही पहली दफा मेरी नजरें उसकी नजरो से टकरा गई । मैने आज तक इतनी खूब सूरत लड़की पहले कभी नही देखि थी। उसके होठ उसकी गर्दन उसके बाल । वो किसी परी से कम नही थी ।
मै उसे देखता ही रह गया और पता भी नही चला की वो कब मेरे पास आकर खड़ी हो गई ।
उसने पूछा क्या देख रहे हो । ये सुनते ही मै एक समय के लिए घबरा गया और हड़बड़ी में बोला कुछ नही । उसने कहा की मै किसी का इन्तजार कर रही हु और क्या तुम्हारे पास लाइटर है मुझे अपनी सिगरेट जलानी है । पहले तो मुझे कुछ अजीब सा लगा पर मैने अपना बैग खोला और उसमे से माचिस दे दी । ( आप को बता दू मै सिगरेट नही पीता ये माचिस सिर्फ जरूरत के वक्त के लिए मै हमेशा अपने पास रखता हु। ) मैने उसकी तरफ देखा और उसने अपनी सिगरेट जला ली और एक लम्बी कस ली और मुझे देखने लगी।
मै मन ही मन सोच रहा था की इतनी खूबसूरत लड़की आखिर इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है । इतने में मैने उससे पूछा की क्या तुम यहाँ किसी का इन्तजार कर रही हो । और अगर तुम्हे डर लग रहा हो तो मै यहाँ तुम्हारे साथ रुक सकता हु अगर तुम चाहो ।
उसने मेरी तरफ बिल्ली नजरो से देखा और कहा ठीक है । मै वही पास में बैठ गया एक तरफ मुझे घर जाने की जल्दी थी और वही दूसरी ओर इतनी मासूम लड़की को मै कैसे अकेले छोड़ देता ।
मैने उससे पुछा कौन आने वाला है तुम्हे लेने ।
कुछ देर रुक कर उसने कहा पापा आ रहे है ।
एक लम्बी खामोशी के बाद मै और वो एक दूसरे को देखने लगे ।
उसने पूछा तुम क्या करते हो । मैने अपनी सारी राम कहानी उसे बता दी । जिससे फिर कुछ देर की खामोशी छा गई । जब मैने उससे पूछा की तुम क्या करती हो। तो उसने मेरी तरफ देखा और कहा की मै कुछ नही करती । ये सुन कर मुझे लगा की जरूर झूठ बोल रही होगी ।
मैने कहा की तुम पढ़ती नही तो वो हँसने ली और कहा की कभी पड़ती थी पर अब नही पढती ।
उसे हँसते देख मुझे भी हँसी आ गई । और फिर हम दोनों बिना वजह smile करने लगे । हमारी बाते युही चलती रही और वक्त निकलता रहा कब हम दोनों दोस्त बन गए पता नही चला ।। मुझे तो यही लगा ।
जल्द ही सुबह होने वाली थी और उसके पापा का कोई ठिकाना नही था । मैने उससे पूछा .... तुम्हारे पाप तो अभी तक नही आए । इन्तजार करते करते सुबह हो गई ।
वो मुझे बस देखती रही और कुछ नही कहा । तभी मेरी नजर आसमान पर गई । और मेने देखा की सूरज निकल रहा था । आज का सूरज बहुत ही चमकीला था । मैने पीछे मुड़ते हुए कहा देखो सूरज कितना खूबसूरत लग रहा है ।
पीछे मुड़ते ही मै जैसे सब कुछ हार चूका था । वो गायब हो गई थी । वहाँ कोई लड़की नही थी । और आस पास बस खामोशी बिखरी थी । मेरे पैरो तले जैसे जमीन खिसक गई हो । जिस लड़की के साथ मैने पूरी रात एक मेट्रो के पुल के निचे गुजारी वो बिना मुझे कुछ कहे कहा चली गई । मैने जितना हो सके उसे आस पास ढूढ़ा पर उसका कोई निशान नही मिला । मै हार चूका था ।
जल्द ही लोगो का आना जाना शुरू हो गया । और अब मै भी घर की ओर चल दिया ।
कुछ दिन तक मै ऐसा ही करता रहा पर वो मुझे नही मिली । 2 महीने बाद वो job मैने छोड़ दिया । और फिर से collage की पढ़ाई में लग गया ।
पर वो लड़की हमेशा के लिए मेरे दिल में रह गई ।
| आखरी ख़ुशी (एक साया) | |||
delhi मेट्रो और ख़ुफ़िया राज ।
दोस्तों मै रवि चौधरी काम से थका हार घर लौट रहा था करीब 10:40 हो रहे थे और मै मेट्रो मे बैठा लोगो के घरो में जलती लाईटो को देख रहा था जो की मेरी थकी आखो को शुकुन दे रहा था । मै जल्दी से जल्दी घर जाना चाहता था। ऊपर से भूख भी लगी थी और नींद भी आ रही थी । मुझे मेट्रो भी बदलनी थी । ताकि मै अपने घर के रुट वाली मेट्रो पर चढ़ सकु पर अभी काफ़ी वक्त था मेट्रो change करने में तो मै गाने सुनने लगा ।
आज मेट्रो में कुछ गिने चुने लोग ही थे । और लगभग मेट्रो खाली ही थी । अचानक मेरी आँखे भारी होने लगी और न जाने कब मुझे नींद आ गई और मै सो गया ।
किसी छोटे बच्चे की तरह जब मेरी आँख खुली तो मै चौक गया और तेजी से चारो ओर देखने लगा पर मुझे कुछ नजर नही आ रहा था । मेट्रो में काफी अँधेरा था और लाइटे भी नही जल रही थी । मैने फौरन अपनी पैंट में हाथ डाला और अपना मोबाइल फ़ोन बाहर निकाला और उसकी लाइट जला कर चारो ओर देखने लगा ।
आप लोगो को जान कर हैरानी होगी की उस वक्त मेट्रो में कोई नही था पूरा मेट्रो खाली था और तेजी से पटरियों पर दौड़ रहा था ।
जल्दी से मैने अपने फोन में टाइम देखा और देखते ही मेरी टाँगे लड़खड़ाने लगी । करीब 1 बजकर 13 मिनट हो रहे थे । मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की मे क्या करुँ । मेट्रो अपनी तेजी से दौड़ती चली जा रही थी पर हैरान करने वाली बात तो ये थी की अभी तक मुझे खिड़कियों से कुछ नजर नही आ रहा था । ऐसा लग रहा था की मै underground में हु।
मै अब इन सब से बाहर निकलना चाहता था इसलिए मैने कुछ कड़े कदम उठाने की सोची । और मै जोर जोर से चिल्लाने लगा ताकि driver मेरी आवाज सुन ले पर सब बेकार इतने सोर में कुछ सुनाई नही दे रहा था । तभी मेरी नजर आपातकालीन बटन पर पड़ी और मै तेजी से उस की ओर बढ़ा । मैने हिम्मत बटोरी और जैसे ही में बटन दबाने वाला था अचानक ट्रेन रुक गई और थोड़ी ही देर में एक अजीब सी खामोशी छा गई।
मै दरवाजे के पास इस उमीद से खड़ा हो गया की दरवाजा खुल जाए और ऐसा ही हुआ । मैने फौरन छलांग लगा दी और मेट्रो से भार निकल आया । अपने फोन की लाइट से मैने चारो ओर देखा तो मैने खुद को किसी सुरंग में पाया । मै हैरान था की मेट्रो सुरंग के बीच में क्या कर रही है ।चारो और कोहरा था और खुद की परछाई भी नही देखि जा सकती थी ।
मै काफी डरा हुआ था और जल्द से जल्द यहां से बाहर निकलना चाहता था । तभी अचानक एक तेज रौशनी को मैने खुद की ओर आते देखा वो कुछ और नही एक दूसरी मेट्रो थी जो मेरी ओर ही आ रही थी ।मुझे लगा की मै अब नही बचूंगा तभी मैने तेजी से फैसला किया और जिस मेट्रो से मै उतरा था फिर उसी मेट्रो में मै तेजी से कूद कर चढ़ गया । तभी अचानक फिर से सारे दरवाजे बन्द हो गए और मेट्रो फिर से चल पड़ी ।
इस बार मुझे लगा की शायद अब हम किसी स्टेशन पर पहुचे । काफी देर से मेट्रो चल रही थी और मै अकेला बैठा सोच रहा था की कब मै इन सब से बाहर निकलूंगा । तभी मेट्रो slow हो गई । मै तेजी से दरवाजे की ओर भागा कोई स्टेशन नजर आ रहा था पर ये आम स्टेशनों से थोडा अलग नजर आ रहा था । गाडी रुक गई और सारे दरवाजे खुल गए । मैने धीरे से कदमो को उतारा और चारो ओर देखने लगा मुझे सामने एक exit डोर नजर आया । मै तेजी से दरवाजे की ओर हो लिया ।
पूरा स्टेशन किसी उजाड़ खाने सा लग रहा था । लगभग हर चीज पुरानी थी और टूटी हुई । मैने दरवाजे को खोला तो कुछ सीडिया नजर आई और मै निचे की ओर उतरने लगा । सब कुछ बहुत पुराना था । छत पर एक टुटा पंखा ,एक पुरानी टूटी हुई खिड़की और जलता बुझता बल्ब । इन सब का कॉम्बिनेशन मौहौल को भूतिया बना रहा था ।
पर मुझे जल्दी से जल्दी यहाँ से निकलना था तभी मुझे आखिर कार एक दरवाजा नजर आया और मैने तेजी से उसे खोला ।
एक सुनहरी चमक ने मुझे हिला दिया ।। सोना (Gold) पूरा कमरा सोने की ईटो से भरा बड़ा था । और तो और न जाने कितनी सोने की मुर्तिया वहाँ रखी पड़ी थी वो कमरा किसी मैदान जितना बड़ा था। और मेरी आँखे इतनी बुरी तरह चमक रही थी की मैने अपने पीछे से आते खतरे को भी नही भाप पाया और किसी ने मेरा गला पकड़ लिया और मेरे नाक पर कोई गन्दी सी चीज रख दी ।
मेरा सर दर्द से फटा जा रहा था और मेरी आखे भी लाल पड़ गई थी । मैने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली और एक तेज रौशनी नजर आई । पहले तो सब धुन्दला था पर धीरे धीरे मुझे नजर आने लगा ।
मै नेहरू प्लेस की एक bench पर सो रहा था । सुबह हो चुकी थी और सर दर्द से फट रहा था । मैने पास के नलके से थोडा पानी पिया और bench पर बैठ गया ।
क्या वो सब मेरा भर्म था । अगर हा तो में नेहरू प्लेस कैसे आया । किसने मुझे यहाँ रख दिया । क्या वो सब सच था । क्या वाकई वो स्टेसन वहाँ था । और अगर था तो क्या वो सोना भी असली था
मेरे मन में कई सवाल थे पर कोई जबाब नही ।
क्या सच में delhi मेट्रो के निचे खजाना था ।
Monday, 30 May 2016
हमारी अधूरी कहानी ।
कहते है की पहली नजर ही काफी होती है दिलो के मिलने के लिए ,
लिफ्ट काफी छोटी थी पर उससे जादा मेरा दिल घबराय हुआ था । मेरे पास एक चाभी थी जो मुझे लौटानी थी पर न उस चाभी से मेरा रिश्ता था न ही उस घर से जहां में जा रहा था। फिर भी कुछ ऐसा था जो मुझे उस ओर खीच रहा था ।
आखिर कार लिफ्ट 3rd फ्लोर पर आ कर रुक गई । और मेरे दिलो की धड़कन तेज हो गई । दरवाजा सामने था । और मेरे कदम थे की उठने का नाम नही ले रहे थे । मुझे डर लग रहा था की पता नही कौन होगा उस पार , उस दरवाजे के पीछे ।
मैने हिम्मत कर के आखिर कार घर की रिंग बजा दी । कुछ देर लगी पर आखिर कार दरबाजा खुल ही गया ।
एक ठण्डी हवा का झोके ने मेरी आँखे बन्द सी कर दी पर जब वो खुली तो लगा जैसे मै कोई सपना देख रहा हूँ । उसने अपनी आखो में काजल लगा रखा था ,रेशमी बालो को ऊपर कर उसने मेरा ध्यान खीचा। और उसके कपड़ो से आ रही उसकी खुसबू ने एक अजीब सा रूहानी माहौल बना दिया ।
जाली दार दरवाजे के पीछे से उसका छुपा हुआ चहेरा दिल की खिचड़ी बना रहा था। और फिर वो हुआ जो मै सुनना चाहता था ,उसकी मीठी सी आवाज । उसने मुझसे पूछा आप कौन ।। पहले तो मेरी घिगी सी बन गई पर जल्द ही मुझे एहसास हुआ की वो मुझे ही देख रही है । मै काफी डर गया था और तेजी से चाभी का गुच्छा उसके हाथो में रख कर मै भाग निकला । पता नही क्यों पर मै उसका सामना नही कर पाया ।
उसकी नजर मेरे आखो से हट ही नही रही थी । रात को भी बस वो ही वो नजर आ रही थी । जब सुबह दिल नही माना तो ,मैने एक ख़ास फैसला लिया की मै कल फिर उस मकान पर जाउगा ।
मिलने की आश
जब आपके पास कोई कारण न हो तो किसी के घर जाना भी किसी जंग से कम नही ,ख़ास कर जब आप किसी लड़की के चक्कर में जा रहे हो । पर जैसे मेरे पैरो में तो पंख लग गए हो और अब रुकना मुश्किल था । घर की रिंग बजाते थोड़ी शर्म आई पर काम बन ही गया । वो दरवाजे पर थी और मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मै कोई भूत हूँ। मै कुछ कहता उससे पहले वो बोल बड़ी, तुम कल आए थे न । मैने अपना सर हां में भर दिया । तो अब क्या चाहिए । उसके सामने मेरे तो होठ ही जाम हो रहे थे । क्या चाहिए बोलो गे भी ।
मेने कहा कुछ भी नही और मै जाने लगा । मै लिफ्ट के पास गया ही था की पीछे से एक आवाज आई , सुनो एक काम है तुम मदद कर सकते हो । ये सुन कर जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया हो । और मेने अपना सर हाँ में हिला दिया ।
कुछ पल
काम कुछ खाश नही था ,बस कुछ किताबे इधर से उधर करनी थी सो मैने कर दी । मेरा ध्यान काम में कम और उसे देखने में जादा था । जब तक काम खत्म हुआ तब तक वो कॉफी बना कर ले आई । बालकनी की ठंडी हवा में उसके लट कभी उसकी आखो पर तो कभी उसके होठो को छु रहे थे । ये सब देख कर ही मेरा पेट भर गया । काफी देर तक तो खामोशी छाई रही । फिर मै ही बोल बैठा , आप यहां कब से है । mom dad , etc.......
उसने कहा : काफी साल गुजर गए यहां रहते हुए अब तो दिन भी याद नही ,मुझे याद है जब माँ मुझे इस घर में ले कर आई थी हम बहुत खुश थे पर माँ अब नही रही । पाप भी चले गए । अब बस में रह गई हूँ ।
ये सब सुनने के बाद काफी देर तक कमरे में खामोशी छाई रही । मै तो बस उसकी आखो को ही देख रहा था। इतनी छोटी सी उम्र में वो कितनी अकेली और तन्हा थी । हम एक दूसरे को जानने की कोशिश करने लगे हर एक पल वो अपनी जिंदगी की किताब के पन्ने खोलती रही और मै सुनता रहा और कब कप से कॉफी कब खत्म हुई पता भी नही चला । कई हफ्ते निकल गए। लगता था जैसे मुझे उससे प्यार हो रहा था पर उसके दिल में क्या था मै नही जानता था। वो तो एक राज़ था।
क्या सब झूठ था ।
अगले दिन मै सुबह -2 तैयार होकर निकल पड़ा। आज तो मै अपने दिल की बात कर के रहुगा । सामने मंजिल थी और मै जोश में था । और जल्दबाजी में मैने 3 की जगह 4 नंबर दबा दिया ,लिफ्ट 4th फ्लोर पर रुक गई और मैने बिना देखे 4th फ्लोर का bell ring बजा दिया । मेरे फेस पर एक चमक थी वो उस वक्त निकल गई जब एक बूढ़े नकल ने दरवाजा खोला । बेटा क्या चाहिए , मैने कहा सर आप कौन है । उन अंकल से बात करने पर पता चला की मे गलती से 4th फ्लोर पर आ गया हूँ। पर वो जादा हैरान तब नजर आए जब मैने कहा की मुझे 3rd फ्लोर पर जाना है । मुझे उनकी आखो में एक डर नजर आया वो काफी घबराए से दिखे ।
Sir आप 3rd फ्लोर का नाम सुन कर इतने घबरा क्यों रहे हो क्या बात है। क्या आप मुझसे कुछ छुपा रहे है ।
सच का दर्द ।
अंकल ने मुझे सारी कहानी बताना शुरू किया। और उन्होंने जो कहा उससे मेरा दिल टूट गया।
वो फ्लोर पिछले 10 सालो से खाली था न वहाँ कोई आता था न कोई जाता । और जिस लड़की की मै बात कर रहा था वो 11 साल पहले ही मर चुकी थी । उसके माता पिता का accident हो जाने के बाद वो एक दम अकेली रह गई थी ,न खाती थी न पिती थी ।बस खोई खोई रहती थी ,
और एक दिन ऐसा भी आया जब वो मरी हुई पायी गई। और पिछले 10 सालो से उस 3rd फ्लोर से रोने की आवाजे आती रहती है ।
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था । लगता था की वो आज भी अपने माँ बाबा का इन्तजार कर रही हो।
तुम्हारी याद आएगी
मै उससे मिलना चाहता था इसलिए में फिर उस 3rd फ्लोर पर गया और bell बजाई ।
उसने दरवाजा खोला । और में अंदर आ गया ।
मै उस की ओर देख रहा था और वो मेरी ओर । तुम कुछ कहना चाहते हो रवि । मैने कहा कुछ नही .. मेरी आँखो से आंसू रुक नही रहे थे पर मै आखिर कर भि क्या सकता था । जिससे मैने इतना प्यार किया वो मन ही मन में कितनी दुखी थी ये तो बस वही जानती थी । मै चाह कर भी अब उसे अपना नही बना सकता था । उसने मुझसे कहा की मै अभी कॉफी बना कर लाती हूँ । हम घण्टो तक एक दूसरे को देखते रहे । आज पता नही क्यों पर न मै कुछ बोल पाया और न ही वो कुछ बोल पाई । जैसे वो जानती हो की मै ये जान चूका हु की वो मर चुकी है । मै उसे खोना नही चाहता था और इस कारण मै रोने लगा और उसके पास जाकर उसे अपनी बाहो में भर लिया । ऐसा लगा जैसे ये मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल हो । उसने मुझे सिर्फ एक ही शब्द कहा thankq । उसने मेरे आँखो पर से मेरे आशु पोछे और कहा आज बहुत दिनों बाद मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ।
और मेरा बाहर जाने का दिल कर रहा है ।
मैने बिना कुछ कहे उसे बाहर ले आया। हम दोनों एक पेड़ के निचे बैठ गए । उसका सर मेरे कन्धे पर था। मै उससे बहुत कुछ कहना चाहता था पर कह नही पा रहा था । उसने कहा रवि मुझे नींद आ रही है ।
मैने उसके बालो पर हाथ फेरते हुए कहा सो जाओ ...... तुम्हारे माँ बाबा तुम्हे बुला रहे है । और हम दोनों ने अपनी आँखे बन्द कर ली । जब मैने अपनी आँखे खोली तो वो जा चुकी थी ।
वो चली गई
अब उस फ्लोर से रोने की आवाजे नही आती ।
मै बस आसा करता हु की वो जहाँ भी हो ठीक हो । वो हमेशा मेरे दिल में रहेगी ।
इश्क सच्चा वही जिसे मंजिले नही मिली ।।




